7 February 2023

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कहो खुल के

गिद्धौर, जमुई एक परिचय

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गिद्धौर दुर्गा मंदिर
जमुई जिले का गिद्धौर की पहचान पुरानी रियासत के साथ-साथ ऐतिहासिक व सांस्कृतिक दृष्टिकोण से काफी ज्यादा है. गिद्धौर का दुर्गा माता मंदिर का अलग इतिहास व परंपरा रहा है. इतिहासकारों की मानें तो चौथी शताब्दी से पहले ही रियासत के तत्कालीन राजा द्वारा अलीगढ़ स्थापत्य से जुड़े राजमिस्त्री से गिद्धौर में पवित्र नदी उच्च वालिया व  नागिन नदी के संगम पर दुर्गा माता मंदिर का निर्माण कराया गया था. यही वजह है कि यहां दुर्गा माता की पूजा अर्चना के लिए हमेशा भक्तों की भीड़ लगी रहती है. किवदंती के अनुसार इस संगम में स्नान कर हरिवंश पुराण का श्रवण करने से पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है. नवरात्र के प्रारंभ से ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी में स्नान कर महिला पुरुष दंडवत करते हुए माता के दरबार तक पहुंचते हैं. दशहरा के अवसर पर यहां के राज्याश्रद्ध मेला में कभी मल्ल युद्ध का अभ्यास, तीरंदाजी, कवि सम्मेलन, नृत्य आदि का आयोजन हुआ करता था. कालांतर में आए बदलाव की वजह से यहां का स्वरूप बदला बदला नजर आता है.
 
महादेव सिमरिया का धनेश्वर नाथ मंदिर
जमुई जिला मुख्यालय के सिकन्दरा-जमुई मुख्य मार्ग पथ पर महादेव सिमरिया में अवस्थित बाबा धनेश्वरनाथ मंदिर की महत्ता काफी है. इतिहासकारों की मानें तो बाबा धनेश्वरनाथ शिव मंदिर स्वयंभू शिवलिंग है. स्वयंभू शिवलिंग को बाबा वैद्यनाथ के उपलिंग के रूप में जाना जाता है. मान्यता है कि यह शिव मंदिर चार सौ साल से भी अधिक पुराना है. यहां बिहार ही नहीं बल्कि सीमावर्ती राज्य झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश से भी श्रद्धालुओं के आने का तांता लगा रहता है. मान्यता के अनुसार गिद्धौर वंश के तत्कालीन महाराजा पूरणमल सिंह को सपना आया था कि महादेव सिमरिया के शिवडीह में शिवलिंग प्रकट हुआ है. महाराजा ने अपने सिपहसालार के साथ विधिवत पूजा अर्चना कर शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा की थी. इस मंदिर में भगवान शिव गर्भगृह में अवस्थित हैं. 
 
मिन्टो टावर का ऐतिहासिक महत्ता
जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गिद्धौर के मिन्टो टॉवर की महत्ता ऐतिहासिक है. कहा जाता है कि मिंटो टावर का निर्माण चंदेल वंश के अंतिम राजा प्रताप सिंह के पिता महाराजा चन्द्रचूड़ सिंह ने अंग्रेज शासक लार्ड मिंटो के सम्मान में करवाई थी. वर्ष 1907 में लार्ड मिंटो गिद्धौर आये थे. उस वक्त राजा ने गिद्धौर रेलवे स्टेशन से मिंटो टावर तक लगभग दो किलोमीटर तक कालीन बिछवाई थी. वे शाही बग्गी पर सवार होकर राजा प्रताप सिंह अपने पिता महाराजा चन्द्रचूड़ सिंह के साथ लार्ड मिंटो की अगुवाई करते हुए टावर तक आये थे. 
 
गुरूद्वारा पक्की संगत
जिले के मोगहार स्थित गुरूद्वारा पक्की संगत प्राचीन गुरूद्वारों में से एक है. जहां सिक्खों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर कुछ समय के लिए रूके थे. गुरु जी के द्वारा प्रयोग किया जाने वाला तकिया एवं कोट आज भी एक कमरे में सहेज कर रखा गया है.
 

जैन मंदिर धर्मशाला
जमुई के पश्चिम से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सिंकदरा में जैन मंदिर और एक धर्मशाला स्थित है। इस धर्मशाला में कुल 65 कमरें है। मंदिर स्थित यह धर्मशाला जैन भक्तों को रहने की सुविधा उपलब्ध कराती है। यह धर्मशाला मंदिर के भीतर स्थित है। जैन मंदिर भगवान महावीर को समर्पित है। काफी संख्या में लोग मंदिर में आते हैं। इसके अलावा यह स्थान भगवान महावीर के जन्म स्थान के रूप में भी जाना जाता है।
 
बहुउद्देशीय चन्द्रशेखर संग्रहालय
बहुउद्देशीय चन्द्रशेखर संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1985 में की गई थी. कहा जाता है कि चन्द्रशेखर संग्रहालय की स्थापना श्री भुवनेश्वर नाथ वर्मा द्वारा की गई थी. संग्रहालय में पुरातात्विक वस्तुओं के साथ-साथ टेरीकोटा सील, प्राचीन चट्टान आदि यहां देखा जा सकता है. संग्रहालय में भगवान विष्णु, भगवान सूर्या, देवी उमा और दुर्गा की अनेक प्रतिमाएं रखी हुई है.  
 
गिद्धेश्वर स्थान
खैरा प्रखंड स्थित गिद्धेश्वर स्थान जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर अवस्थित है. किवदंती के अनुसार राम एवं रावण की लड़ाई में जब रावण सीता का अपरहण कर लंका जा रहा था, तो यही वह स्थान है जब युद्ध राज्य जटायु ने रावण से युद्ध किया था.  गुस्से में रावण ने जटायु का पंख काट डाला था, यहीं पर वे गिरकर मौक्ष को प्राप्त किया था. इसलिए इस स्थान का नाम गिद्धेश्वर पड़ा. गिद्धेश्वर महादेव मंदिर आस्था का केंद्र होने के कारण यहां भक्तों की भीड़ लगी रहती है. कहा जाता है कि एक सौ वर्ष पूर्व खैरा स्टेट के तत्कालीन तहसीलदार लाला हरिनंदन प्रसाद द्वारा मंदिर का निर्माण कराया गया था.
 
क्रमश:

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