24 November 2020

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कहो खुल के

नई शिक्षा नीति और बच्चे 

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नई शिक्षा नीति और बच्चे 
बेबाक अड्डा 

लेखक : श्याम किशोर सिंह. 

नई शिक्षा नीति के तहत बुनियादी शिक्षा से लेकर इंटरमीडिएट स्तर तक की शिक्षा को दुरुस्त करने का प्रयास किया गया. नई शिक्षा नीति में अर्ली चाइल्डहुड बच्चों व बड़ों को शिक्षित करने के साथ-साथ उसे जॉब ओरिएंटेड भी बनाया गया है. भारत वर्ष के बच्चों के लिए नई शिक्षा नीति कितना कारगर होगा. यह भविष्य के गर्त में छुपा हुआ है. गोवर्धन सहित हाई स्कूल देवघर के सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक श्याम किशोर सिंह ने बेबाकी से अपनी बातों को रखा.

नई शिक्षा नीति देश हित में

पहले के सिलेबस में जॉब ओरिएंटेड का अभाव था. नई शिक्षा नीति बच्चों एवं कम पढ़े लिखे लोगों के लिए लाभदायक एवं शुभ होगा. इसमें बच्चे आसानी से जॉब कर सकते हैैं, अथवा जिस फिल्ड में जाना चाहते हैं, वे जा सकते हैं. जहां तक पढ़ना चाहते हैं, वे पढ़ भी सकते हैं. कम पढ़े लिखे लोग भी अच्छी नौकरी प्राप्त कर अपना जीवन यापन कर बेहतर वातावरण बना सकते हैं. आप बहुत ही प्रशंसनीय कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है. हम उनकी शिक्षा नीति की प्रशंसा करते हैं. एक लंबे अरसे के बाद या शिक्षा नीति बदली है. यह देश हित में है.
 
अर्ली चाइल्डहुड से ही भविष्य बेहतर है
अर्ली चाइल्ड हुड में इंग्लिश पेटर्न स्कूल में बच्चे जाते हैं. एक खास तरह की शिक्षा उनको मिलती है. लेकिन भारत जैसे देश में जो जरूरत है, उसका एक प्रारूप तैयार नहीं हो पाता है. उसके चलते उनका आगे का एजुकेशन पा कर भी वो जॉब ओरिएंटेड नहीं हो पाता है. खास-खास बच्चे बहुत अच्छा करते हैं. अधिकांश बच्चे भटक जाते हैं. उसके चलते भारत की जरूरत पूरा नहीं हो पाता है. इसलिए किड्स से लेकर ऊपर तक की शिक्षा तक अभी प्रारूप तैयार किया गया है. लागू होने वाला है. उसका भविष्य बेहतर है.
 
ओवरनाइट बदलाव कठिन है
नई शिक्षा नीति में चुनौतियां कम नहीं है. कोऑर्डिनेटर टीचर को बहाल करना होगा. ओवरनाइट बदलना बड़ा ही कठिन है, जो ट्रेंड अभी तक चल रहा है. उसे ऑल ऑफ सडन चेंज नहीं कर सकते हैं. लेकिन इन द लांग रन (यदि व्यवस्था अच्छी हुई) पॉलीटिकल बैकग्राउंड, एजुकेशनल बैकग्राउंड के तहत पॉलिसी बनाई जाए तो सेंट्रल एवं स्टेट गवर्नमेंट की ओर से, गार्जियन भी सही ढंग से एक्सेप्ट करें एवं कॉर्पोरेट करें तो निश्चित रूप से यह सफल होगा. समय लगेगा, लेकिन अंततोगत्वा इसमें सफलता मिलेगी.
 
ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था एक नया प्रयोग है
अभी तक बच्चों ने ऑनलाइन शिक्षा देखा नहीं है, सुना भी नहीं था. ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था एक नया प्रयोग है. कोरोना के कारण प्राइवेट स्कूल अपने जस्टिफिकेशन के लिए उनका फी नहीं मरे, टीचर का पेमेंट, स्कूल का मेंटेनेंस कॉस्ट, उसकी भरपाई करने के लिए ऑनलाइन पढ़ाई ढूंढा गया है. इससे बच्चों से ट्यूशन फी, स्कूल फी ले पाएंगे. अगर नहीं पढ़ाते हैं तो उन्हें दिक्कत होगी. इसलिए एक एक्सक्यूज खोजा गया. शहर के बच्चे आज भी 40 परसेंट से ज्यादा इसको नहीं समझ पा रहे हैं. देहात में बुरी हालत है. ना बिजली है, ना स्मार्ट फोन है, ना कंप्यूटर है, ना ही फोन कॉल का नेटवर्क है. इसके चलते काफी परेशानी है है.
 
व्यावहारिकता स्कूल में नजर नहीं आती है
बच्चों पर किताबों का बोझ बड़ी समस्या है. यह वर्षों  से चली आ रही है. बीच-बीच में बताया जाता है कि नर्सरी से स्टैंडर्ड तीन तक के बच्चों की किताबें स्कूल में ही रहेगी. वे घर नहीं लाएंगे. टास्क स्कूल में ही बना कर बच्चे फुर्सत में हो जाएंगे. घर पर कोई काम नहीं होगा. लेकिन यह सिर्फ कहने के लिए है. व्यावहारिकता स्कूल में नजर नहीं आती है. इसलिए यह देश के लिए बड़ी समस्या है. जितना बच्चों का बोझ नहीं है, उससे ज्यादा उन पर किताब कॉपी का बोझ है. लेकिन अब कोशिश हो रही है कि बच्चों पर किताब कॉपी का बोझ कम हो, लिमिट किया जा रहा है. भविष्य में बच्चे कितने किताब कॉपी लेकर स्कूल जाएंगे. इससे भी तय किया जा रहा है.

 
इंटरमीडिएट तक सभी विषयों की पढ़ाई करनी होगी
नई शिक्षा नीति के तहत इंटरमीडिएट तक सभी विषयों (साइंस, आर्ट्स व कॉमर्स) की पढ़ाई विद्यार्थियों को करनी होगी. फिलहाल इसका कोई परिणाम नहीं आएगा. क्योंकि वर्तमान शिक्षा प्रणाली से समाज एवं देश अभ्यस्त हो चुका है. लेकिन सही ढंग से इसे इंप्लीमेंट किया जाए, बच्चे व गार्जियन कॉर्पोरेट करें तो निश्चित रूप से नई पॉलिसी भविष्य में सफल होगी. इससे बच्चे व गार्जियन को भी काफी लाभ होगा. 
 
स्कूल प्रबंधन एवं शिक्षकों को मानसिक रूप से तैयार रहना होगा
नई शिक्षा नीति को हम कैसे ढालें, हर स्कूल इसे लागू करें. इसके लिए स्कूल प्रबंधन एवं शिक्षकों को मानसिक रूप से तैयार रहना है. पुरानी शिक्षा नीति से यह काफी अलग है. पुरानी नीति से समाज एवं देश को ज्यादा फायदा नहीं हो रहा था. नई पॉलिसी देश हित में होगा.
 
वन नेशन, वन पॉलिसी शिक्षा की होनी चाहिए
भारतवर्ष में शिक्षा की वन नेशन, वन पॉलिसी होनी चाहिए. हर स्टेट अपने अपने तरीके से अलग-अलग ढंग से पढ़ाई कराता है. यह देश हित में नहीं है. इसीलिए वन नेशन, वन सिलेबस, वन एग्जामिनेशन की पॉलिसी होनी चाहिए. तभी यह राज्य व देश हित में होगा.
 
क्षेत्रीय लैंग्वेज को इनकरेज करना होगा
नई एजुकेशन पॉलिसी में क्षेत्रीय लैंग्वेज को इनकरेज करना होगा. इसके लिए अलग से इंतजाम किया जाए. लेकिन जो नेशनल पॉलिसी है, उसमें नेशनल लैंग्वेज को ज्यादा से ज्यादा प्राथमिकता देते हुए, उसे प्रोत्साहित किया जाए. लॉर्ड मैकाले की शिक्षा नीति में भारतीयों का शोषण होता था. उसमें सिर्फ प्रोडक्शन की बात होती थी. लेकिन अब वो बात नहीं है. हर क्षेत्र में विकास होगा. कम शिक्षा वाले हो अथवा उच्च शिक्षा वाले. सभी को काम-रोजगार मिलेगा. 
 
प्राइवेट स्कूल शिक्षा के नाम पर सिर्फ पैसों की वसूली करती है
नई शिक्षा नीति के तहत सरकार को पॉलिसी बनानी होगी की आम लोग भी बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकें. प्राइवेट स्कूल सिर्फ पैसा ही वसूलती है. आज की शिक्षा सिर्फ पैसों की शिक्षा हो गई है. सरकार को इस पर गंभीरता से सोचना होगा. जिससे कि गरीब बच्चे भी बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकें, और उस में सहयोग कर सकें.
 
 

(लेखक : श्याम किशोर सिंह, गोवर्धन साहित्य हाई स्कूल देवघर के सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक हैं)

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Author: Bebaak adda

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