7 February 2023

bebaakadda

कहो खुल के

पर्यटन के लिए राजधानी रांची में जैविक उद्यान से टैगोर हिल, रॉक गार्डन, पहाड़ी मंदिर, सूर्य मंदिर, दुर्गा मंदिर देवरी तमाड़ भी घूमने आये

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पर्यटन के लिए राजधानी रांची में जैविक उद्यान से टैगोर हिल, रॉक गार्डन, पहाड़ी मंदिर, सूर्य मंदिर, दुर्गा मंदिर देवरी तमाड़ भी घूमने आये
बेबाक अड्डा, रांची
झारखंड की राजधानी रांची दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल का सबसे प्रमुख जिला है. देश के किसी भी हिस्से से रांची पहुंचने के लिए हवाई मार्ग, सड़क मार्ग व रेल मार्ग प्रमुख साधन है. रांची का बिरसा मुंडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश के व्यस्ततम हवाई अड्डे में शामिल है. यही वजह है कि पर्यटकों के लिए रांची आना काफी सुखद अनुभूति प्रदान करता है. रांची प्रवास के दौरान आप तमाड़ स्थित दुर्गा मंदिर देवड़ी, जगन्नाथ मंदिर, सूर्य मंदिर, पहाड़ी मंदिर में मत्था टेक कर आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं. वहीं टैगोर हिल, बिरसा मुंडा जैविक उद्यान, रॉक गार्डन, नक्षत्र वन, कांके डैम, सिदो कान्हू पार्क, बिरसा मृग विहार पर्यटन स्थल का सैर कर ताजा स्फूर्ति प्राप्त कर सकते हैं. रांची, छोटानागपुर पठार का मध्यवर्ती भाग होने के कारण इसे छोटानागपुर का पठार भी कहा जाता है. समुद्र तल से रांची जिले की भूमि की औसत ऊंचाई 600 मीटर है. यही वजह है कि इस जिले से दर्जनों छोटी बड़ी नदियां प्रवाहित होती है. पठार के चारों ओर घाटिया होने के कारण घने जंगल हैं.
टैगोर हिल : मोरहाबादी हिल टैगोर हिल के नाम से प्रसिद्ध है. रांची से महज 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है. टैगोर हिल का मुख्य आकर्षण यहां का मनोरम वातावरण है. टैगोर हिल के टॉप पर पहुंचकर आप रांची के सुंदर प्राकृतिक व मनोहारी दृश्यों का नजारा ले सकते हैं. इतिहास के अनुसार यह स्थान रविंद्र नाथ टैगोर के अग्रज ज्योतिरिंद्र नाथ टैगोर के जीवन से भी जुड़ा हुआ है.
नक्षत्र वन : यहां बहुत सारे दुर्लभ जड़ी बूटियों के पौधे हैं, जो इंसान के स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक है. ग्रह नक्षत्रों के बारे में वैज्ञानिक तरीके से जानकारी देता यहां का पर्यावरण बच्चों एवं बड़ों के लिए मनोरंजन के साथ-साथ उन्हें कई जानकारियां भी उपलब्ध कराता है. नक्षत्र बन के बीचो-बीच स्थित धन्वंतरी की प्रतिमा लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है. इसे हाल के वर्षों में ही विकसित किया गया है.
बिरसा मुंडा जैविक उद्यान : बिरसा मुंडा जैविक उद्यान पेड़ पौधों के साथ-साथ वन्य प्राणियों से भी यह उद्यान परिपूर्ण है. यह रांची मुख्यालय से महज 16 किलोमीटर पूर्व में रांची-पटना मार्ग पर ओरमांझी के समीप स्थित है. यहां हर वक्त सैलानियों की भीड़ लगी रहती है.
रॉक गार्डन : रॉक गार्डन से आप कांके डैम का नजारा सहज तरीके से ले सकते हैं. रॉक गार्डन में भूत बंगला लोगों के आकर्षण का केंद्र होता है. काफी डरावना होने के बावजूद यह पर्यटकों के लिए मनोरंजन का केंद्र बिंदु बना हुआ है. रांची के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेना है तो रॉक गार्डन घूमना मत भूलिए.
कांके डैम : रांची के उत्तर में गोंदा पहाड़ी के समीप कांके डैम है. यह रांची से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यह पिकनिक स्पॉट होने के साथ-साथ इस डैम से रांची की कुल आबादी के एक चौथाई को पेयजल आपूर्ति भी सुनिश्चित होता है.
बिरसा मृग बिहार : बिरसा मृग विहार कालीमाटी में अवस्थित है. यह रांची से महज 35 किलोमीटर दूर रांची-खूंटी मार्ग पर है. बड़े भूभाग में फैला यह मृग विहार पर्यटक को को खूब लुभाता है. हिरणों का खुले आकाश के नीचे कुलांचे भरना काफी मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करता है.
सिदो कान्हू पार्क : सिदो कान्हु पार्क 9.4 1 हेक्टेयर में फैला हुआ है. स्वतंत्रता सेनानी सिदो एवं कान्हु की स्मृति में स्थापित यह पार्क मोरहाबादी स्थित है. झारखंड गठन के बाद यहां विकास कार्य के रूप में झरना, तालाब, घास का मैदान, विभिन्न प्रकार के फूलों की क्यारियां का निर्माण किया गया है.
तमाड़ का दुर्गा मंदिर देवड़ी : रांची-जमशेदपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित दुर्गा मंदिर देवड़ी रांची से करीब 60 किलोमीटर दूर है. यहां भक्तों के साथ साथ पर्यटकों का भीड़ हमेशा लगा रहता है. दुर्गा मंदिर के गर्भ गृह में 16 भुजाओं वाली मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित है. इतिहासकारों की मानें तो यह मंदिर 11 वीं-12वीं शताब्दी पुरानी है.
पहाड़ी मंदिर : पहाड़ी पर स्थित शिव मंदिर करीब 300 फीट ऊंची है. यह रांची रेलवे स्टेशन से महज 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. मंदिर की खासियत यह है कि यहां हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस एवं गणतंत्र दिवस पर झंडोत्तोलन होता है. इतिहासकारों की मानें तो ब्रिटिश हुकूमत में इस पहाड़ी की चोटी पर विद्रोहियों को फांसी की सजा दी जाती थी. इस की चोटी से रांची शहर की खूबसूरती अनोखे अंदाज में देखा जा सकता है.
जगन्नाथ मंदिर : ओडिशा की स्थापत्य कला पर निर्मित मंदिर झारखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है. रथ यात्रा के अवसर पर यहां विशाल मेला लगता है. इतिहासकारों की मानें तो नागवंशी राजा ठाकुर एनी शाहदेव द्वारा वर्ष 1691 में रांची से महज 12 किलोमीटर की दूरी पर इस मंदिर का निर्माण कराया गया था. पहाड़ी पर स्थित मंदिर को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि यह किला के रूप में विद्यमान है.
सूर्य मंदिर : रांची- जमशेदपुर मार्ग पर बुंडू के समीप स्थित सूर्य मंदिर रांची शहर से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. संगमरमर से निर्मित इस मंदिर का निर्माण 18 पहियों और सात घोड़े के रथ पर सवार भगवान सूर्य के रूप में किया गया है. टुसू मेला के मौके पर यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है.

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