27 June 2022

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कहो खुल के

त्रिकुट रोपवे हादसा

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त्रिकुट पर्वत पर इंडियन एयरफोर्स, इंडियन आर्मी, एनडीआरएफ, आईटीबीपी एवं प्रशासन की टीम ने 32 लोगों को बचाया, दो की मौत, रेस्क्यू जारी
बेबाक अड्डा, देवघर/दुमका
त्रिकुट रोपवे हादसे में फंसे में 32 लोगों की जान रेस्क्यू कर इंडियन एयरफोर्स, इंडियन आर्मी, एनडीआरएफ, आईटीबीपी एवं प्रशासन की टीम ने बचायी है. रविवार की शाम पांच बजे की घटना के बाद अबतक दो लोगों की मौत हो चुकी है. अभी भी 13 लोगों का रेस्क्यू किया जाना बांकी है.
सोमवार को संध्या 5.50 बजे तक रेस्क्यू किया गया. लेकिन, शाम होने के कारण रेस्क्यू को रोक दिया गया है. अब मंगलवार की सुबह रेस्क्यू किया जायेगा. इससे पहले सोमवार की सुबह ही इंडियन एयरफोर्स की टीम देवघर पहुंच गयी थी.  त्रिकुट रोप-वे हादसे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का काम सोमवार को दिन भर युद्धस्तर पर जारी रहा. केबिन ट्राली संख्या 19 में फंसे दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड के 45 वर्षीय रोजगार सेवक राकेश कुमार मंडल की एक हजार फीट से अधिक की उंचाई से गिरने से मौत हो गयी. इससे पहले रविवार की शाम में एक महिला की मौत हो गयी थी. सुबह करीब आठ बजे वायुसेना की टीम ने उड़ान भरी और जगह का जायजा लिया. एक घंटे के बाद नौ बजे के करीब वायुसेना का एक हेलीकाप्टर काफी नीचे आया और उसमें से एक कमांडो रस्सी के सहारे नीचे उतरा। उसने आठ नंबर और फिर 18 नंबर केबिन में फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया. वह सफल नहीं हो पाया. हवा तेज रहने के कारण काम में परेशानी हुई. 11 बजे के करीब टीम ने अपना काम शुरू किया. वायुसेना की टीम जहां टाप में केबिन संख्या एक से तीन और 23 नंबर से चार लोगों को सकुशल बाहर निकला. सेना का एक जवान तार के सहारे 18 नंबर केबिन तक पहुंचा और उसने एक-एक कर उसमें फंसे एक पुरुष, एक महिला व पांच बच्चों को बाहर निकाल लिया. 18 लोगों को बाहर निकालने के बाद दोपहर करीब 12:30 बजे काम रोक दिया गया. शाम 4:50 तक 29 लोगों को बाहर निकाल लिया गया.
ड्रोन के सहारे खाने पीने का इंतजाम
ट्राली के केबिन में फंसे लोग डर, गर्मी के साथ भूख व प्यास के शिकार हो गये हैं. लोग केबिन से हाथ निकालकर मदद की गुहार लगा रहे हैं. लोगों को पानी व खाना की जरूरत है. ऐसे में ड्रोन कैमरा की मदद ली गयी. ड्रोन कैमरा की मदद से सभी केबिन में बारी-बारी से रस्सी पहुंचाया गया. उस रस्सी को केबिन में फंसे लोगों ने अपने हाथ में लिया. उसके बाद उसने नीचे झुला दिया. उस रस्सी में नीचे से लोगों ने पानी की बोतल व खाने की चीज बांध दी. उसे फिर से केबिन में फंसे लोगों ने अपने पास खींच लिया. इस तरह खाने पीने का कुछ सामान पहुंच जाने से लोगों ने कुछ हद तक राहत की सांस ली.
सुबह छह बजे उतरे वायुसेना के दो हेलीकाप्टर
देवघर एयरपोर्ट पर सुबह छह बजे वायुसेना का दो हेलीकाप्टर रेस्क्यू आपरेशन के लिए उतरे. एक हेलीकाप्टर ने यहां से उड़ान भरकर त्रिकुट पर्वत पर रोपवे में फंसे लोगों की स्थिति को जाना. फिर वह वापस एयरपोर्ट लौट आया. इनके साथ एनडीआरएफ की भी टीम थी. जब दोबारा रेस्क्यू शुरू किया गया तो घोरमारा के सोनारायठाढ़ी मोड़़ पर बने अस्थायी हेलीपैड पर हेलीकाप्टर की लैंडिंग करायी जाने लगी.
कुर्सी सहारे सबसे पहले छह यात्री निकाले गये
त्रिकुट पहाड़ के रोपवे में रात भर फंसे 48 पर्यटकों को सकुशल नीचे उतारने के लिए वायुसेना, आर्मी और स्थानीय युवक शिद्दत से जुटे रहे. दिन के 11.15 बजे सबसे पहले छह लोगों को केबिन से निकाला गया. एयरफोर्स हेलीकाप्टर से कमांडो रस्सी के सहारे केबिन तक पहुंचे. पहले आठ नंबर केबिन का गेट जवान ने खोला, फिर पर्यटकों को बचाना शुरू किया. स्थानीय पन्नालाल समेत कई युवक जमीन की सतह से 50 फीट पर लटक रहे केबिन से चार यात्रियों को रस्सी में कुर्सी बांधकर एक एक कर नीचे उतारा. विशेष हेलीकाप्टर से त्रिकुट रोपवे के केबिन से यात्रियों को निकालने का आपरेशन सुबह ही शुरू हो गया था.
रोपवे में पूरी रात हवा में अटके रहे 48 लोग
रविवार की शाम में देवघर रोपवे पर हादसा में रोपवे का सैप टूटने से अचानक हवा में करीब 75 से अधिक लोग फंस गये.  इनमें से 24 लोगों को तो देर रात तक ही निकाल लिया गया था. 12 केबिन में फंसे 48 पर्यटक पूरी रात हवा में अपनी सांसें थामे जमीन से करीब 1500 फीट ऊपर लटके रहे. इससे पहले सुबह करीब सवा पांच बजे भारतीय सेना व आइटीबीपी की टीम बचाव कार्य के लिए त्रिकुट रोपवे पहुंची. साढ़े पांच बजे पटना से एनडीआरएफ की टीम आयी. देवघर की 30 सदस्‍यीय एनडीआरएफ टीम व जिला प्रशासन के लोग पूरी रात अपने स्‍तर से रोपवे में फंसे लोगों को बचाने में जुटे रहे. जिले के डीसी मंजूनाथ भजंत्री, एसपी, सांसद डॉ निशिकांत दुबे समेत अपनों की सकुशल वापसी का इंतजार कर रहे स्वजन भी पूरी रात घटनास्‍थल पर ही डटे रहे.
रविवार को एक महिला की मौत हो गयी थी
घटना में एक दर्जन लोग घायल हो गये हैं. एक महिला सुमति देवी की मौत इलाज के क्रम में सदर अस्पताल में हो गयी. सिविल सर्जन डा सीके शाही ने इसकी पुष्टि की है.
त्रिकुट पर्वत पर झारखंड का एकमात्र रोपवे
 झारखंड का एकमात्र रोपवे देवघर के त्रिकुट पर्वत पर है. यहां पर्यटक पर्वत पर जाते हैं. रविवार को रोपवे ने ज्योंही यात्रा प्रारंभ की, इसके टाप लेवल के रोप का सैप टूट गया. रोप वे का संचालन दामोदर वैली कंपनी करती है.
साइट इंचार्ज ने कहा
 घटना से हम स्‍तब्‍ध: त्रिकुट रोपवे की साइट इंचार्ज विनीता सिन्‍हा ने हादसे के बाद कहा कि हम इस घटना से स्तब्ध हैं। लोगों को बचाने के लिए पूरे धैर्य से बचाव टीम काम कर रही है। हम फंसे हुए यात्रियों को बचाने में पूरी शिद्दत से लगे हैं। उन्‍होंने कहा कि रोपवे का केबिन बहुत मजबूत था, इसलिए बड़ा नुकसान नहीं हुआ। भविष्य में भी ऐसी स्थिति उत्पन्न नही होगी, इसके लिए सजगता और बढ़ाएंगे। हम यात्रियों और उनके परिवार के सदस्यों के साथ खड़े हैं, उनकी हर जरूरत में मदद करेंगे।
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