27 June 2022

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कहो खुल के

ओएस्टर (ढींगरी) मशरूम उगाने की विधि

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ओएस्टर (ढींगरी) मशरूम की खेती कैसे करें ? इसकी विधि

by- सत्यम ब्रह्मचारी

बेबाक अड्डा

उत्‍तर भारत में ढींगरी खुम्‍बी उगाने का उपयुक्‍त समय अक्‍तुबर से मध्‍य अप्रैल के महीने हैं। ढींगरी खुम्‍बी की फसल के लिए 20 से 28 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान त‍था 80-85% आर्द्रता बहुत उपयुक्‍त होती है। आजकल ढींगरी की 12 से अधिक प्रजातियॉ भारत के विभिन्‍न भागों में उगायी जाती हैं।

व्यवसायिक रूप से मशरूम के तीनों प्रकार की खेती की जाती है लेकिन आज हम ओएस्टर मुशरूम की खेती पे विशेष ध्यान देंगे ,आप विस्तार से जानना चाहते हैं तो हमारे टेलीफोन नंबर पे भी कांटैक्ट कर सकते हैं , वो हम इस आर्टिक्ल के अंत में उपलब्ध करवा देंगे।

ढ़ींगरी (ऑयस्टर) मशरूम की खेती वर्ष भर की जा सकती है। इसके लिए अनुकूल तापमान 20-30 डिग्री सेंटीग्रेट और सापेक्षित आर्द्रता 80-85%  प्रतिशत चाहिए। ऑयस्टर मशरूम को उगाने में गेहूं व धान के भूसे और दानों का इस्तेमाल किया जाता है। यह मशरूम 2.5 से 3 महीने में तैयार हो जाता है। इसका उत्पादन अब पूरे भारत वर्ष में हो रहा है। ढ़ींगरी मशरूम की अलग-अलग प्रजाति के लिए अलग-अलग तापमान की आवश्यकता होती है, इसलिए यह मशरुम पूरे वर्ष उगाई जा सकती है। 10 कुंतल मशरूम उगाने के लिए कुल खर्च 50 हजार रुपये आता है। वर्तमान में ऑयस्टर मशरूम 120 रुपए प्रति किलोग्राम से लेकर एक हजार रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बाजार में बिक जाता है। मूल्य उत्पाद की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।

मशरुम की खेती के लिए स्थाई व अस्थाई दोनों ही प्रकार के सेड का प्रयोग किया जा सकता है। जिन किसानों के पास धन की कमी है, वह बांस व धान की पुआल से बने अस्थाई सेड/झोपड़ी का प्रयोग कर सकते हैं। बांस व धान की पराली से 30 Χ22Χ12 (लम्बाई Χचौड़ाई Χऊंचाई) फीट आकार के सेड/झोपड़ी बनाने का खर्च लगभग 30 हजार रुपए आता है, जिसमें मशरूम उगाने के लिए 4 Χ25 फीट आकार के 12 से 16 स्लैब तैयार की जा सकती हैं।

स्पॉन (बीज) के जरिए मशरूम की खेती की जाती है, इसके लिए सात दिन पहले ही मशरूम के स्पॉन (बीज) लें, ये नहीं की एक महीने मशरूम का स्पान लेकर रख लें, इससे बीज खराब होने लगते हैं। इसके उत्पादन के लिए भूसा, पॉलीबैग, कार्बेंडाजिम, फॉर्मेलिन और स्पॉन (बीज) की जरूरत होती है। दस किलो भूसे के लिए एक किलो स्पॉन की जरूरत होती है, इसके लिए पॉलीबैग, कार्बेंडाजिम, फॉर्मेलिन, की जरूरत होती है।

बीजाई की शुरूआत..

तकरीबन दस किलो भूसे को 100 लीटर पानी में भिगोया जाता है, इसके लिए 150 मिली. फार्मलिन, सात ग्राम कॉर्बेंडाजिन को पानी में घोलकर इसमें दस किलो भूसा डुबोकर उसका शोधन किया जाता है। भूसा भिगोने के बाद लगभग बारह घंटे यानि अगर सुबह फैलाते हैं तो शाम को और शाम को फैलाते हैं तो सुबह निकाल लें, इसके बाद भूसे को किसी जालीदार बैग में भरकर या फिर चारपाई पर फैला देते हैं, जिससे अतिरिक्त पानी निकल जाता है।

भूसा के रूप में हम धान का पुआल या गेहूं का ताज़ा भूसा दोनों में से कोई एक उपयोग में ला सकते हैं।

इसके बाद एक किलो सूखे भूसे को एक बैग में भरा जाता है, एक बैग में तीन लेयर लगानी होती है, एक लेयर लगाने के बाद उसमें स्पॉन की किनारे-किनारे रखकर उसपर फिर भूसा रखा जाता है, इस तरह से एक बैग में तीन लेयर लगानी होती है। पंद्रह दिनों में मिलने लगेगा ऑयस्टर बैग में स्पॉन लगाने के बाद पंद्रह दिनों में इसमें ऑयस्टर की सफेद-सफेद खूटियां निकलने लगती हैं, ये मशरूम बैग में चारों तरफ निकलने लगता है।

आप पोलेथीन बैग को निकाल भी सकते हैं, और मुशरूम की कटाई कर सकते हैं ,इस मशरूम में सबसे अच्छी बात होती है इसे किसान सुखाकर भी बेच सकते हैं, इसका स्वाद भी तीनों मशरूम में सबसे बेहतर होता है। इसे हमारे बिहार में मटन मशरूम भी कहा जाता है।

आपको मशरूम उगाने से लेकर बेचने तक की जानकारी हमसे चाहिए तो आप बेजिझक हमारे नंबर पे कॉल कर सकते हैं हाँ  हम मशरूम लगाने से लेके खरीदने और बेचने सारे स्तर पे आपको सपोर्ट करेंगे और साथ रहेंगे , हमारा नंबर है -09473215770

सत्यम ब्रह्मचारी (संस्थापक)
ब्रह्मचारी हर्बल मशरुम फार्म एवं प्रशिक्षण केंद्र, डुमराव, बक्सर, बिहार

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